मन फिर परमात्मासे प्रार्थना करता है --
प्रभो ! प्रभो ! दया करिए, हे नाथ ! मैं आपकी शरण हूँ ! हे शरणागतप्रतिपालक ! शरण आयेकी लज्जा रखिये ! हे प्रभो ! रक्षा करिये, रक्षा करिये; एक बार आकर दर्शन दीजिये ! आपके बिना इस संसारमें मेरे लिये कोई भी आधार नहीं है, अतएव आपको बारंबार नमस्कार करता हूँ, प्रणाम करता हूँ, विलम्ब न करिये, शीघ्र आकर दर्शन दीजिये ! हे प्रभो ! हे दयासिंधो !! एक बार आकर दासकी सुध लीजिये !
आपके न आनेसे प्राणोंका आधार कोई भी नहीं दीखता ! हे प्रभो ! दया करिए,दया करिए, मैं आपकी शरण हूँ, एक बार मेरी और दयादृष्टिसे देखिये ! हे प्रभि ! हे दीनबन्धो !! हे दीनदयालो !!! विशेष न तरसाइये, दया करिये ! मेरी दुष्टताकी और न देखकर अपने पतितपावन स्वभावका प्रकाश करिये !!३!!
