※हमको तो 60 वर्षों के जीवनमें ये चार बातें सबके सार रूप में मिली हैं - 1. भगवान् के नामका जप 2. स्वरुपका ध्यान 3. सत्संग(सत्पुरुषोंका संग और सत्त्-शास्त्रोंका मनन) 4. सेवा ※ जो ईश्वर की शरण हो जाता है उसे जो कुछ हो उसीमें सदा प्रसन्न रहना चाहिये ※ क्रिया, कंठ, वाणी और हृदयमें 'गीता' धारण करनी चाहिये ※ परमात्मा की प्राप्तिके लिए सबसे बढ़िया औषधि है परमात्माके नामका जप और स्वरुपका ध्यान। जल्दी-से-जल्दी कल्याण करना हो तो एक क्षण भी परमात्माका जप-ध्यान नहीं छोड़ना चहिये। निरंतर जप-ध्यान होनेमें सहायक है -विश्वास। और विश्वास होनेके लिए सुगम उपाय है-सत्संग या ईश्वरसे रोकर प्रार्थना। वह सामर्थ्यवान है सब कुछ कर सकता है।

शुक्रवार, 23 मई 2014

गीताप्रेस के संस्थापक-विशिष्ट सहयोगी-२८-


।। श्रीहरिः ।।

आज की शुभतिथि-पंचांग

ज्येष्ठ कृष्ण, नवमी, शुक्रवार,  वि० स० २०७१

गीताप्रेस के संस्थापक-विशिष्ट सहयोगी-२८-

 

२-श्रीहनुमानप्रसाद जी पोद्धार (भाई जी)

सेठजी की कर्मशक्ति की धारा घनश्याम जी में जैसे उतरी थी, वैसे ही उनकी भावशक्ति की धारा श्रीभाईजी में उतरी । उनमे भक्ति की एक मधुर प्रखर धारा बह निकली । श्रीभाई जी ने हरिनाम का रस, लीला का रस बरसाना शुरू किया और हजारों नही, लाखों-लाखों व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से इस भावराज्य में प्रवेश कराया ।

आरम्भ में कहते है, श्रीभाईजी ने श्रीगोयन्दका जी को ही सम्बोधित कर यह भजन बनाया था-

जयति देव, जयति देव, जय दयालु देवा ।

परम गुरु, परम पूज्य, परम देव देवा ।।

सब विधि तव चरन-सरन आई परयों दासा ।

दीं, हीन-मति-मलीन, तदपि सरन आसा ।।

पातक अपार किन्तु दया को भिखारी ।

दुखित जानि राखु सरन पाप-पुंजहारी ।।

अबलौके सकल दोष क्षमा करहु स्वामी ।

ऐसो करूं, जाते पुनि हौ, न कुपथगामी ।।

पात्र हौं, कुपात्र हौं, भले अनधिकारी ।

तदपि हौं तुम्हारों, अब लेहूँ मोहि उबारी ।।

लोग कहत तुम्हरो सब, मनहु कहत सोई ।

करिय सत्य सोई नाथ !, भव-भ्रम सब खोई ।।

मोरि और जनि निहारी, देखिय निज तनही ।

हठ करि मोहि राखिय हरी ! संतत तल पनही ।।

कहों कहा बार-बार, जानहु सब भेवा ।

जयति, जयति, जय दयालु, जय दयालु देवा ।।

परम गुरु, परम पूज्य, परम देव देवा ।।.. शेष अगले ब्लॉग में       

गीताप्रेस के संस्थापक, गीता के परम प्रचारक, प्रकाशक  श्रीविश्वशान्ति आश्रम, इलाहाबाद

नारायण ! नारायण !! नारायण !!! नारायण !!! नारायण !!!